May 1, 2026, Friday
१८ बैशाख २०८३, शुक्रबार
Trending

संविधान दिवस २०८२ पर बर्दिया में भव्य शांति रैली — राजनीतिक संकट का समाधान संविधान के भीतर ही खोजा जाना चाहिए

संविधान दिवस २०८२ पर बर्दिया में भव्य शांति रैली — राजनीतिक संकट का समाधान संविधान के भीतर ही खोजा जाना चाहिए

बर्दिया — संविधान दिवस २०८२ के अवसर पर नेपाली कांग्रेस ने देशभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन कर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसी क्रम में कांग्रेस बर्दिया द्वारा जिला मुख्यालय गुलरिया में एक भव्य रैली निकाली गई, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और नागरिकों की उत्साहजनक भागीदारी रही।

रैली में नेपाली कांग्रेस के केंद्रीय सदस्य जाबेदा खातुन, जिला सभापति अरुण प्रकाश सिंह राठौर, सचिव जग्गा प्रसाद पाण्डे, सुधारवादी नेता नेता यमनाथ घिमिरे, कमल प्रसाद रेग्मी,चिरञ्जीवी ज्ञवाली, दीपक जंग शाह, रामचन्द्र थापा सहित सैकड़ों नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।

रैली के दौरान संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लोकतंत्र, समावेशिता और राजनीतिक स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। नारों, बैनरों और झंडों के माध्यम से संविधान की रक्षा और समृद्ध नेपाल की कामना की गई।

नेपाली कांग्रेस ने प्रतिनिधि सभा के विघटन को असंवैधानिक करार देते हुए इसका विरोध करने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाले ऐसे कदम संविधान की भावना के विपरीत हैं।

इस विषय पर सुधारवादी नेता यमनाथ घिमिरे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया का विरोध नहीं करेगी, लेकिन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाएगी। उन्होंने कहा कि “लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से नहीं चलता, बल्कि प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता ही इसकी आत्मा है।”

संविधान दिवस २०८२ के अवसर पर नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउवा ने देशवासियों को शुभकामना देते हुए संविधान की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “देश में उत्पन्न राजनीतिक संकट का समाधान संविधान के भीतर ही खोजा जाना चाहिए। संविधान देश का सर्वोच्च कानून है, और यदि हम इससे बाहर समाधान खोजने की कोशिश करते हैं, तो इससे और अधिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।”

देउवा ने संविधान की सफलता को देश की समृद्धि से जोड़ते हुए इसे सभी नागरिकों की साझा जिम्मेदारी बताया। उनका संदेश था कि लोकतंत्र की रक्षा और स्थायित्व के लिए संविधान का पालन ही एकमात्र रास्ता है।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह आगामी चुनावों का विरोध नहीं करेगी, लेकिन चुनाव की प्रक्रिया, समयबद्धता, और राजनीतिक संवाद की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाएगी। पार्टी का मानना है कि बिना समुचित संवाद और सहमति के चुनावी घोषणा लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर सकती है।

इसी अवसर पर शान्ति र लोकतन्त्रका लागि पेशागत संजाल (पापड) तथा संविधान दिवस मूल समारोह समिति के संयुक्त आयोजन में गुलरिया में एक विशेष शांति रैली भी आयोजित की गई। रैली का मुख्य नारा था: “भ्रष्टाचारको अन्त्य, सुशासन र शान्ति हाम्रो चाहाना!! संविधान रक्षाको गर्दछौ कामना!!” (भ्रष्टाचार का अंत, सुशासन और शांति हमारी चाह — संविधान की रक्षा हमारी कामना)

कार्यक्रम की शुरुआत शहीद पार्क से हुई, जहाँ विभिन्न कालखंडों के सभी शहीदों को एक मिनट का मौनधारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात शांति रैली निकालकर जिला अस्पताल बर्दिया पहुँचा गया, जहाँ अस्पताल में भर्ती मरीजों को फलफूल वितरण कर रैली का समापन किया गया।

इस आयोजन में स्थानीय नागरिक, पेशागत समूह, सामाजिक संस्थाएँ, व्यापारी वर्ग तथा विभिन्न संघ-संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता रही। आयोजकों ने सभी सहभागी एवं सहयोगी पक्षों को हार्दिक आभार व्यक्त किया।

संविधान दिवस तथा राष्ट्रिय दिवस २०८२ शुक्रवार को पूरे देश में विविध कार्यक्रमों के साथ उल्लासपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर राजधानी काठमांडू के ऐतिहासिक टुँडिखेल मैदान में आठवें संविधान दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया।

समारोह में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उच्च पदाधिकारी, सुरक्षा निकायों के प्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक संगठनों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में संविधान की ऐतिहासिक यात्रा, लोकतंत्र की उपलब्धियाँ तथा संघीय गणतंत्र की मजबूती पर प्रकाश डाला गया।

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “जनता की आवाज की सुनवाई ही लोकतंत्र की आत्मा है। संविधान दिवस संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र की उपलब्धियों का मूल्यांकन करने का दिन है।”

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, शहीदों को श्रद्धांजलि, झण्डोत्तोलन तथा संविधान के महत्व पर वक्तव्य प्रस्तुत किए गए। देशभर के सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों तथा स्थानीय निकायों में भी संविधान दिवस को सम्मानपूर्वक मनाया गया।