सोनम वांगचुक की गिरफ़्तारी—एक इनोवेटर से जन आंदोलनकारी तक का सफ़र
लेह — लद्दाख में बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद प्रसिद्ध शिक्षाविद, पर्यावरण कार्यकर्ता और नवप्रवर्तनकर्ता सोनम वांगचुक को उनके गांव उलेटोक्पो से गिरफ़्तार कर लिया गया है। यह गिरफ़्तारी उस समय हुई जब उनकी भूख हड़ताल का 15वां दिन चल रहा था। इस आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में 4 लोगों की मौत और 50 से अधिक लोग घायल हुए।
पृष्ठभूमि: आंदोलन की जड़ें
- 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।
- वांगचुक ने इस फ़ैसले का स्वागत किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद भी दिया था।
- लेकिन जल्द ही उन्होंने लद्दाख को संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग शुरू की।
आंदोलन की प्रमुख घटनाएँ
| वर्ष | गतिविधि | विवरण |
|---|---|---|
| मार्च 2024 | भूख हड़ताल | 21 दिन तक लद्दाख के लिए संविधानिक अधिकारों की मांग |
| अक्टूबर 2024 | पैदल मार्च | लद्दाख से दिल्ली तक पैदल यात्रा; सिंघु बॉर्डर पर हिरासत |
| सितंबर 2025 | भूख हड़ताल | 35 दिन की भूख हड़ताल के दौरान हिंसक प्रदर्शन |
सोनम वांगचुक: एक प्रेरणादायक सफ़र
- जन्म: 1966, उलेटोक्पो, लेह
- बचपन में स्कूल से दूर रहे, माँ से घर पर शिक्षा ली
- 12 वर्ष की उम्र में अकेले दिल्ली जाकर केंद्रीय विद्यालय में दाख़िला लिया
- श्रीनगर के एनआईटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई
- पढ़ाई के लिए कोचिंग शुरू की, जिससे तीन साल की फ़ीस दो महीने में जुटा ली
शिक्षा और नवाचार में योगदान
- SECMOL की स्थापना (1988): वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली
- Operation New Hope (1994): 700 शिक्षक और 1000 ग्राम शिक्षा समितियों को प्रशिक्षित किया
- HIAL की स्थापना: सौर ऊर्जा आधारित नवाचारों को सेना और अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँचाया
- 2018: रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित
विवाद और आलोचना
- हालिया हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर आलोचना
- कुछ लोगों ने उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाए, उन्हें ‘चीनी एजेंट’ तक कहा
- पाकिस्तान यात्रा और मोहम्मद यूनुस से मुलाक़ात की तस्वीरें वायरल
लोकप्रियता और प्रेरणा
- ‘थ्री इडियट्स’ के रैंचो किरदार से जोड़ा गया, हालांकि उन्होंने इससे इनकार किया
- शिक्षा, नवाचार और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत
वर्तमान स्थिति
लेह में कर्फ़्यू लगा दिया गया है। केंद्र सरकार ने वांगचुक को हिंसा के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है, जबकि उनके समर्थक उन्हें शांतिपूर्ण लोकतंत्र के प्रतीक मानते हैं।
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी लेह में हुई हिंसा को लेकर उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता का कहना है कि इसके पीछे ‘बहुत बड़ी साज़िश’ थी
यह समाचार न केवल लद्दाख की राजनीतिक स्थिति को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक नवप्रवर्तनकर्ता जन अधिकारों की लड़ाई में अग्रणी बन सकता है। यदि आप चाहें, तो मैं इस विषय पर एक जनजागरूकता अभियान, संपादकीय लेख, या वीडियो स्क्रिप्ट भी तैयार कर सकता हूँ—जो लुम्बिनीपत्र की आवाज़ को और सशक्त बनाए।
बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ प्रदर्शन के बाद लाठीचार्ज, शहर में तनाव
जुमे की नमाज़ के बाद ‘आई लव मोहम्मद’ के समर्थन में हुए प्रदर्शन ने बरेली में तनावपूर्ण माहौल पैदा कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आला हज़रात दरगाह और मौलाना तौक़ीर रज़ा ख़ान के घर के बाहर प्लेकार्ड लहराए, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
- कई प्रदर्शनकारी घायल हुए, कुछ की हालत गंभीर
- पुलिस ने फ़्लैग मार्च किया, संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू
- मंत्री जयवीर सिंह ने इसे “शांति भंग करने की साज़िश” बताया
- विपक्ष ने लाठीचार्ज को “दमनकारी” और “तानाशाही” करार दिया
- सोशल मीडिया पर अफवाहों की रोकथाम के लिए निगरानी बढ़ाई गई
प्रशासन ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है।

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