करवा चौथ 2025: 200 वर्षों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, ग्रहों की शुभ स्थिति से व्रत और पूजा का मिलेगा दोगुना फल

करवा चौथ 2025: 200 वर्षों बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, ग्रहों की शुभ स्थिति से व्रत और पूजा का मिलेगा दोगुना फल

नई दिल्ली । इस वर्ष करवा चौथ का पर्व 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है और सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए रखा जाता है। इस बार का करवा चौथ विशेष रूप से ऐतिहासिक और शुभ माना जा रहा है क्योंकि 200 वर्षों बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है।

शुभ योगों का संगम

इस वर्ष करवा चौथ पर सिद्धि योग, शिववास योग, और चतुर्थी तिथि का शुक्रवार से मेल जैसे तीन अत्यंत शुभ योग एक साथ बन रहे हैं।

  • सिद्धि योग: 9 अक्टूबर सुबह 09:32 बजे से 10 अक्टूबर शाम 05:41 बजे तक। इस योग में व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • शिववास योग: सूर्योदय से शाम 07:38 बजे तक। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं, जिससे पूजा अत्यंत फलदायी होती है।
  • चतुर्थी + शुक्रवार: यह संयोग भगवान गणेश और मां लक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद प्रदान करता है।

ग्रहों की विशेष स्थिति

इस बार करवा चौथ पर ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत शुभ है, जो व्रत के प्रभाव को और अधिक बढ़ा रही है।

ग्रह संयोग प्रभाव
सूर्य + शुक्र (कन्या राशि) शुक्रादित्य योग—धन, व्यापार, नौकरी में उन्नति
बुध + मंगल (तुला राशि) साहस और बुद्धिमत्ता का संचार
चंद्रमा का गोचर (वृषभ राशि) कृतिका से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश—अत्यंत दुर्लभ योग
अन्य ग्रह स्थितियाँ शनि मीन में, राहु कुंभ में, गुरु मिथुन में, केतु सिंह में

इस ग्रह स्थिति से प्रेम, सौंदर्य, वैवाहिक सुख और सम्मान के कारक ग्रहों का प्रभाव व्रत को अत्यंत फलदायी बना रहा है।

मुहूर्त और चंद्रोदय (दिल्ली समयानुसार)

विवरण समय
पूजा मुहूर्त शाम 05:57 से 07:11 बजे तक
चंद्रोदय रात 08:34 बजे
व्रत अवधि सुबह 06:19 से रात 08:34 बजे तक

धार्मिक और सामाजिक महत्व

करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति में अखंड सौभाग्य और पातिव्रत्य धर्म का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं। इस बार के दुर्लभ योगों और ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण यह पर्व विशेष रूप से फलदायी और ऐतिहासिक माना जा रहा है।

लुम्बिनिपत्र इस अवसर पर सभी व्रतधारी महिलाओं को शुभकामनाएं देता है और आग्रह करता है कि इस शुभ दिन को श्रद्धा, प्रेम और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाएं।